8 मार्च 1917, को पेट्रोग्राद के कपड़ा कारख़ानों की सैकड़ों महिला श्रमिकों ने हड़ताल पर जाने का फ़ैसला किया।वे ’युद्ध मुर्दाबाद’ और ‘रोटी नहीं तो काम नहीं’ के नारे लगा रहे थे। इस हड़ताल के बाद निरंतर विरोध प्रदर्शन हुए और अंततः ज़ारशाही का अंत हुआ और रूसी क्रांति की शुरुआत हुई। 1920 में बोल्शेविक नेता एलेक्जेंड्रा कोल्लोन्ताई ने लिखा था कि सोवियत गणराज्य में महिलाओं के पास अधिकार और वोट है,  लेकिन ‘जीवन पूरी तरह से बदला नहीं है।