पूर्वी एशिया एक गहरे विरोधाभास से गुज़र रहा है: यह क्षेत्र वैश्विक विकास का इंजन है, लेकिन यूएस साम्राज्यवाद इसे नए शीत युद्ध की रणभूमि बनाना चाहता है।
ओकिनावा के किसानों से लेकर फ़िलीपींस के ‘मैग्निफिसेंट 12’ तक — एशिया के लोगों ने यूएस सैन्यवाद का सामना पहले भी किया है। विरोध की यह परम्परा आज और भी ज़रूरी हो उठी है, क्योंकि…