अस्सी साल बाद यूएन, संरचनात्मक सीमाओं और राजनीतिक विभाजनों से ऐसा जकड़ा है कि यह कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पाता – ग़ज़ा जनसंहार इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
वैश्विक उत्तर के उदारवादियों और सामाजिक जनतंत्रवादियों की निष्क्रियता और सहभागिता ने दुनियाभर में ख़ास क़िस्म के चरम दक्षिणपंथ के विकास की ज़मीन तैयार की है।
फ़िलिस्तीन से लेकर सूडान तक साम्राज्यवादी जंग बच्चों की जिंदगियाँ तबाह कर रही है। बचपन में लगे सदमे का शारीरिक-मानसिक प्रभाव लंबे समय तक उनपर बना रहेगा।
आईसीसी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया। इसके बावजूद यूएस ने ‘हमेशा इज़राइल का साथ देने’ की बात कही है।
मुख्यधारा का मीडिया फिलिस्तीन, जहाँ अब तक 114,000 लोग मारे जा चुके हैं, पर खबर करते हुए सच को या तो तोड़-मरोड़ रहा है या उसे छिपाते हुए झूठ पेश कर रहा है। इससे उलट…
1 अक्टूबर 1949 को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई। अपनी क्रांतिकारी प्रक्रिया के पचहत्तर वर्षों में, चीन ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए भी उल्लेखनीय प्रगति की है।