विकलांग लोग समाज में शरणार्थी नहीं, बल्कि इसका हिस्सा हैं। इनके साथ होने वाले अन्याय दिखाते हैं कि समाज इंसानी गरिमा से ज़्यादा मुनाफ़े को तरजीह देता है।
वैश्विक दक्षिण आईएमएफ के शिकंजे में फंसा है। इसमें सुधार की कोशिशों को वैश्विक उत्तर नाकाम कर रहा है, इसलिए ग़रीब मुल्क ब्रिक्स जैसे संस्थान बना रहे हैं।